Concept of Development and its Relationship with learning. (विकास की अवधारणा तथा अधिगम के साथ उसका सम्बन्ध)

विकास की अवधारणा (Concept of Development)

हमें इस हैडिंग में बालक के विकास के बारे में जानना है। तथा विकास क्या होता है ? इसे समझना है।
  • बालक का विकास उसके जन्म से पूर्व गर्भ में ही शुरू हो जाता है। इस प्रकार उसका विकास क्रमिक रूप से गर्भावस्था, शैशवास्था, बाल्यावस्था, किशोरावस्था, प्रौढ़ावस्था, इत्त्यादि कई अवस्थाओं में क्रम से गुजरते हुए परिपक्वता की स्थिति प्राप्त करता है।
  • बाल विकास में हमें शैशवास्था (Infancy) से लेकर किशोरावस्था (Adolescence) तक अध्ययन करना है।
  • बालक का विकास कई आयामों में होता है जैसे-
  • शारीरिक विकास
  • क्रियात्तमक विकास (कार्य शैली)
  • संज्ञानातत्मक विकास (बुद्धि विकास)
  • संवेगातमक विकास (भावनाओ का विकास)
  • भाषा व सामाजिक विकास
  • विकास की प्रक्रिया क्रमिक (क्रम से) तथा सतत (लगातार) जीवनपर्यन्त चलती है।
  • विकास को मुख्यतः हम दो पदों में देखते हैं, पहला गुणात्तमक विकास (Qualitative) तथा दूसरा मात्रात्तमक विकास (Quantitative)।
  • गुणात्तमक विकास (Qualitative Development) का अर्थ है ऐसा विकास जिसमे बालक के गुणों का विकास होता हो जैसे– सोचना, विचार करना, निर्णय लेना, समस्या-समाधान करना, इत्त्यादि।
  • तथा मात्रात्मक विकास (Quantitative Development) का अर्थ है जिसमे बालक का भौतिक विकास (शरीर सम्बंधित) होता है जैसे– शरीर की लम्बाई बढ़ना, वजन बढ़ना, इत्त्यादि।
  • मात्रात्तमक विकास (Quantitative Development) को हम वृद्धि (Growth) के नाम से भी जानते हैं।
  • बालक में विकास तो जीवनपर्यन्त (जन्म से मृत्त्यु) चलता है परन्तु वृद्धि एक समय आने पर रुक जाती है, जिसे हम परिपक्वता कहते हैं।
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